
1. Introduction – NEET पुन: परीक्षा से पहले Telegram पर प्रतिबंध, कोर्ट ने सरकार के फैसले को सही ठहराया
NEET-UG 2026 की पुन: परीक्षा से पहले केंद्र सरकार ने मैसेजिंग ऐप Telegram पर 22 जून तक के लिए अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया था। इस फैसले को चुनौती देते हुए Telegram ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन कोर्ट ने सरकार के फैसले को सही ठहराते हुए Telegram की याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि सरकार का यह कदम “असंगत” नहीं है और यह NEET परीक्षा की गरिमा बनाए रखने के लिए जरूरी था।
2. Telegram Ban: क्यों लगाया गया प्रतिबंध?
सरकार ने Telegram पर प्रतिबंध लगाने का फैसला NEET-UG 2026 की पुन: परीक्षा से पहले लिया, जो 21 जून 2026 को आयोजित होनी है। यह फैसला राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की सिफारिश पर लिया गया था। सरकार ने आरोप लगाया कि Telegram का उपयोग परीक्षा से जुड़ी धोखाधड़ी और फर्जी पेपर लीक की अफवाहें फैलाने के लिए किया जा रहा था।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में कहा कि Telegram “नए डार्क वेब” जैसा बन गया है, जहां परीक्षा से जुड़ी धोखाधड़ी को अंजाम दिया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि Telegram की मैसेज एडिटिंग फीचर का दुरुपयोग करके पुराने टाइमस्टैम्प के साथ एडिटेड मैसेज डालकर फर्जी पेपर लीक का सबूत बनाया जा रहा था।
3. Telegram की दलील: “150 मिलियन यूजर्स के अधिकारों पर चोट”
Telegram ने कोर्ट में अपनी याचिका में कहा कि सरकार के इस फैसले से भारत में 150 मिलियन (15 करोड़) से अधिक यूजर्स के अधिकारों पर चोट लगी है। Telegram ने तर्क दिया कि वह एक “फोर्स फॉर गुड” है और उसने हाल के हफ्तों में भारत में सैकड़ों ऐसे चैनलों को हटा दिया है जो लीक हुई परीक्षा सामग्री साझा कर रहे थे।
हालांकि, सरकार ने दावा किया कि Telegram के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले दोनों पक्षों के बीच दो सप्ताह तक बातचीत चली, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। सरकार ने यह भी कहा कि Telegram चैनलों को ब्लॉक करने के पिछले प्रयास विफल रहे थे, क्योंकि बंद किए गए चैनल मिनटों में दोबारा सक्रिय हो जाते थे।
4. दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला: “सरकार का आदेश उचित”
दिल्ली हाईकोर्ट की सिंगल बेंच, जस्टिस तेजस कारिया ने Telegram की याचिका को खारिज करते हुए सरकार के फैसले को बरकरार रखा। कोर्ट ने कहा कि सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 69A के तहत आपातकालीन शक्तियों का सहारा लेते हुए कानूनी प्रक्रिया का पालन किया है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार का आदेश “सबसे कम प्रतिबंधात्मक” था और यह NEET परीक्षा की गरिमा बनाए रखने के लिए एक आपातकालीन हस्तक्षेप था। जस्टिस कारिया ने कहा कि सरकार ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग नहीं किया है और यह आदेश “निराधार” नहीं है।
प्रतिबंध 22 जून 2026 तक प्रभावी रहेगा, जो NEET-UG 2026 की पुन: परीक्षा (21 जून) के एक दिन बाद की तारीख है।
5. NTA का पक्ष: “Telegram का दुरुपयोग परीक्षा प्रणाली के लिए खतरा”
NTA ने कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि Telegram का उपयोग परीक्षा से जुड़ी धोखाधड़ी के लिए किया जा रहा था। NTA ने बताया कि Telegram पर “PAPER LEAKED NEET”, “Re-NEET 2026”, “Private Mafia” और “REE NEET MAFIAA” जैसे नामों से चैनल चलाए जा रहे थे। ये चैनल छात्रों से कुछ हजार रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक की मांग कर रहे थे।
NTA ने यह भी आरोप लगाया कि Telegram चैनल मैसेज एडिटिंग फीचर का उपयोग करके यह झूठा आभास दे रहे थे कि प्रश्न पत्र परीक्षा से पहले उपलब्ध थे। IIT मद्रास के निदेशक ने भी Telegram की इस कमजोरी की पुष्टि की।
6. विपक्ष की प्रतिक्रिया: राहुल गांधी ने उठाए सवाल
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार को “पेपर लीक माफिया” पर हमला करना चाहिए, न कि छात्रों पर। उन्होंने Telegram प्रतिबंध को छात्रों के अधिकारों पर हमला बताया और सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की।
हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया कि यह कदम छात्रों के खिलाफ नहीं, बल्कि परीक्षा प्रणाली की गरिमा बनाए रखने और धोखाधड़ी रोकने के लिए उठाया गया है।
7. Telegram पर प्रतिबंध: क्या यह सही कदम था?
विशेषज्ञों की राय इस मुद्दे पर बंटी हुई है। कुछ का मानना है कि सरकार का यह कदम NEET परीक्षा की गरिमा बनाए रखने के लिए जरूरी था, जबकि कुछ इसे “बैंड-एड सॉल्यूशन” करार दे रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि Telegram को ब्लॉक करने से परीक्षा से जुड़ी धोखाधड़ी की समस्या का समाधान नहीं होगा और सरकार को इस समस्या के मूल कारणों पर ध्यान देना चाहिए।
सरकार ने अपने बचाव में कहा कि Telegram चैनलों को ब्लॉक करने के पिछले प्रयास विफल रहे थे, इसलिए पूरे प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाना ही एकमात्र विकल्प था। कोर्ट ने भी इस तर्क को स्वीकार किया और कहा कि सरकार का यह कदम “सबसे कम प्रतिबंधात्मक” था।
8. Conclusion – Telegram प्रतिबंध: NEET परीक्षा की गरिमा बनाए रखने की कोशिश
Telegram पर लगाया गया प्रतिबंध NEET-UG 2026 की पुन: परीक्षा से पहले एक विवादास्पद लेकिन आवश्यक कदम था। दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार के इस फैसले को सही ठहराते हुए Telegram की याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि यह कदम NEET परीक्षा की गरिमा बनाए रखने और धोखाधड़ी को रोकने के लिए उठाया गया था।
हालांकि, इस मुद्दे ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सरकारी नियंत्रण, छात्रों के अधिकारों और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता जैसे बड़े सवालों को भी जन्म दिया है। यह देखना होगा कि आने वाले समय में सरकार और Telegram के बीच इस विवाद का क्या नतीजा निकलता है।
